Monday, 12 March 2018

आत्महत्या : ग़लत कौन ?

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अभी कुछ महीने पहले ही में बॉलीवुड की वरिष्ठ पार्श्‍व गायिका आशा भोंसले की पुत्री वर्षा भोंसले ने मुंबई स्थित अपने घर में रिवाल्वर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वर्तमान युग में आत्महत्या एक निंदनीय कार्य समझा जाता है, परंतु प्राचीन काल में ऐसा नहीं था; बल्कि यह निंदनीय की अपेक्षा एक सम्मानीय कार्य समझा जाता था। हमारे देश की सतीप्रथा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है जिसमें पत्नी अपने पति की चिता में कूदकर ख़ुद को सती करती थी। क्या सती प्रथा में सती हुई स्त्री का वह कार्य आत्मदाह नहीं है। इसके अतिरिक्त मोक्ष आदि धार्मिक भावनाओं से प्रेरित होकर भी उस समय लोग आत्मदाह करते थे। ये तो सभी जानते हैं कि आत्महत्या या आत्मदाह या ख़ुद को आत्मघात पहुँचाना ग़लत है किंतु कभी आप उन लोगों की परिस्थिति को समझ के देखिये जो यह आत्मघाती क़दम उठाते हैं।

आत्महत्या करने वाले की मानसिक स्थिति हम इस प्रकार समझने कोशिश कर सकते हैं। यदि आपको कोई ग़लत समझता है और आप इस बात से व्यथित हैं लेकिन आप इस बात को साबित करने में भी पूरी तरह सक्षम नहीं हैं तो आप क्या करेंगे। इसमें भी जो बात आपको व्यथित कर रही है यदि वह आपके चरित्र, जीने की चाह या आपके आत्मविश्वास को इस कदर गिरा दे और आप कुछ न कर सकें तो आप क्या करेंगे। यहाँ मैं एक उदाहरण देना चाहूँगा जैसे मान लीजिए कोई कम शिक्षित लड़की जिसकी अभी-अभी शादी हुई हो और उसका पति उसके चरित्र पर संदेह करे तो वह स्त्री या लड़की अपने चरित्र की पवित्रता कैसे साबित करे। इतना ही नहीं जब उसके बच्चे को उसका पति अपना मानने से इंकार कर दे तो वह क्या करे?। उस लड़की के घरवाले भी इसमें उसका साथ न दें तो वह क्या करें?
जाहिर है वह अपनी जीवनलीला समाप्त करना चाहेगी। अब यहाँ ग़लती उस लड़की न होकर उसका साथ न देने वाले लोगों की है। चाहे उसके माता-पिता, भाई-बहन हों या पति के परिवार से सास-ससुर, देवर-नंद आदि। 
आत्महत्या करने वाले लोगों की जानने का प्रयास किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि जब उन्हें यह लगने लगता है कि उन्हें कोई प्यार या पसंद नहीं करता अथवा उनके होने न होने से किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता तो आत्महत्या उसके दिमाग़ में बेहतर रास्ता होता है। 


नवंबर 2013




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